स्वामी रामानंद का जन्म प्रयाग में हुआ था। वे उत्तर भारत के एक महान भक्ति संत थे। वे भगवान श्रीरामजी के भक्त थे। 

स्वामी रामानंद

संत नामदेव भारत के महाराष्ट्र में जन्मे संत-कवि थे। वे भगवान विठ्ठल का परम भक्त था। उनके हाथ से साक्षात भगवान विठ्ठल ने दूध पिया था। 

संत नामदेव

चैतन्य महाप्रभु भक्ति योग के परम प्रचारक एवं भक्तिकाल के प्रमुख संतों में से एक हैं। उन्होंने नाम संकीर्तन को जन-जन में फैलाया। वे सगुण भक्ति को प्रमुख मानते थे।

चैतन्य महाप्रभु 

गोस्वामी तुलसीदासजी एक महान संत थे। तुलसीदासजी को हनुमानजी, श्रीरामजी और लक्ष्मणजी ने दर्शन दिए थे और उन्होंने श्रीरामचरितमानसजी की रचना की थी।

गोस्वामी तुलसीदास

मीराबाई 16वीं शताब्दी की परम कृष्ण भक्त और कवयित्री थीं। मीरा बाई ने ही कृष्ण भक्ति के स्फुट पदों की रचना की थी।

मीराबाई

महात्मा सूरदास भक्तिकाल के महान संत और कवि थे। वे भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त और ब्रजभाषा के श्रेष्ठ कवि थे। 

सूरदास

नरसिंह मेहता भक्ति साहित्य के प्रसिद्ध और श्रेष्ठतम कवि थे। उन्होंने सुविख्यात पद "वैष्णव जन तो तैणे कहिए जे पीड पराई जाणे रे" की रचना की थी। 

नरसिंह मेहता

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